प्रश्नोत्तर P14-0031 · भाग 14
गुरु जी, जीवन में तप का महत्व क्या है? ज्यादातर हम तप, उपवास, व्रत से भागते हैं कि इसकी क्या जरूरत है।
अगर अपने आप को समझना है, अपने आप में होना है, अपने वजूद, अपने अस्तित्व को समझना है, तो आपको तप करना पड़ेगा। आप भोजन और भोग में ही तो भागे हो। जब आप बिना पानी का एक दिन, दो दिन, तीन दिन व्रत रखोगे, तब आपको समझ में आएगा कि बंधन कितना है। खा-पी के बढ़िया मजे में रहते हैं और कहते हैं मैंने सब छोड़ दिया — छोड़ना इतना आसान नहीं है जितना आप समझते हो। जब आप तप करते हो तब पता चलता है कि मेरे कितने बंधन हैं, परिवार से कितना बंधन है, मेरी कितनी जिम्मेदारियां हैं, मेरा कितना कर्तव्य है। तब भूख समझ में आती है, प्यास समझ में आती है, भोजन के प्रति आस्था पैदा होती है कि मेरे जीवन में भोजन का, प्रकृति का, पानी का कितना महत्व है। तप नहीं करोगे तो ये बातें समझ में ही नहीं आएंगी, बस बातें रहेंगी। ज्यादातर लोग ध्यान कर रहे हैं, भक्ति कर रहे हैं, ज्ञान मार्ग पर चल रहे हैं, लेकिन तप नहीं कर रहे, इसलिए कुछ हो नहीं रहा। जो पहुंचे, उन्होंने अपने जीवन में तप किया। तप से पाप-पुण्य दोनों का नाश होता है, क्योंकि तप में आप होते हो। भक्ति करोगे तो कोई इष्ट है, ध्यान करोगे तो विचार हैं, योग मार्ग पर अनेक क्रियाएं हैं, ज्ञान मार्ग पर शब्द हैं — लेकिन तप में सिर्फ आप होते हो, कुछ नहीं रहता। इसलिए तप करना श्रेष्ठ है।
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वीडियो: जीवन में तप का महत्व / #योगीजी_का_सत्संग #जीवन #तप #महत्व #satsang · 2024-08-05