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प्रश्नोत्तर P14-0036 · भाग 14

गुरु जी, जैसे-जैसे ऊंचाई पर चढ़ते हैं गिरने का खतरा बढ़ता है। हम गिरें ना, इसके लिए क्या ध्यान रखें?

अगर तप लालच में नहीं कर रहे हो, तो गिर नहीं सकते। लालच में करोगे तो गिर जाओगे, कोई बचा ही नहीं सकता — लालच की पूर्ति होगी तो भी गिरोगे, नहीं होगी तो भी गिरोगे। अगर बिना इच्छा-अपेक्षा का तप करते हो, तो गिरोगे नहीं, उठोगे; वो एक नया अनुभव होगा आपके जीवन का। तप में आप होते हो — कुछ नहीं चाहिए, मैं अपने आप को समझने के लिए तप करूं — इसमें गिरना होता ही नहीं। गिरना तो दो में होता है: ये आगे निकल गया, मैं पीछे रह गया, तब अहम भाव खड़ा हो जाता है। एक में क्या गिरना, क्या उठना? यहां यात्रा अकेले ही करनी है, बस नया-नया अनुभव मिलेगा। अनुभव करते-करते जब अनुभव करने के लिए कुछ नहीं बचता, अनुभव करता बचता है — वही सत्य है। अभी तो अपने तक पहुंचो; 'मेरा' में ब्रह्म नहीं, भ्रम है। पहले मेरा से छुटकारा पाओ, सत्य तक आओ, सत्य ब्रह्म तक लेकर जाएगा।

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वीडियो: जीवन में तप का महत्व / #योगीजी_का_सत्संग #जीवन #तप #महत्व #satsang · 2024-08-05