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प्रश्नोत्तर P14-0079 · भाग 14

गुरु जी, अद्वैत को 'दो नहीं' कह कर छोड़ दिया गया, पर फिर भी दो के ही दर्शन हो रहे हैं — यह बात सही कैसे हो सकती है?

दो से परेशानी नहीं है, दो में जो राग-द्वेष है उससे परेशानी है। अनंत है। दो से तो हमारा जन्म है — पिता से जन्म हुआ, माता ने पाला। जिन्होंने अद्वैत का प्रचार किया, वो भी बीमार हुए, तकलीफ हुई तो परिवार से मिलने गए; जब एक ही होता तो लोगों को समझाते क्यों, कौन किसको बता रहा है? और जब एक ही होता तो भटकाव, भ्रांतियां, भ्रम कैसे पैदा होते? ब्रह्म अजन्मा है, ब्रह्म कभी भटक सकता है क्या? परमात्मा से आत्मा है, और आत्मा पिंड में आकर अपनी इच्छा-अपेक्षा में, राग-द्वेष में भटक गया। द्वैत क्या है — राग-द्वेष है। राग-द्वेष से अपने आप को छुड़ा लो, खत्म। जब तक राग-द्वेष में हो, आप इस संसार में नहीं, अपने बनाए हुए संसार में फंसे हो, और पीड़ा इस संसार में नहीं, आपके बनाए हुए संसार में है। किसी भी मार्ग से जाइए, बस यह समझना है कि राग-द्वेष से कैसे अपने आप को छुड़ा लूं।

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वीडियो: ईश्वर सर्वव्यापी है इसका क्या मतलब है / #ईश्वर #सर्वव्यापी · 2024-04-10