प्रश्नोत्तर P14-0090 · भाग 14
गुरु जी, मोह-माया ही सभी कर्म-बंधनों की जड़ है; जिस क्षण प्राणी इससे परे हो गया, कोई कर्म उसे बांध नहीं सकता — मोह-माया क्या है?
अपने तरीके से चाहिए — वही तो मोह-माया है। पांच इंद्रियों से सुख मिलता है — शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श। पांचों सबसे ज्यादा कहां मिलते हैं — नर-मादा के मिलन में, भोग में; और चार भोजन में। तो भोग और भोजन में ज्यादातर लोग फंसे हुए हैं। जब तक अपने तरीके से भोग और भोजन चाहिए, तब तक माया में फंसे रहोगे। अपने तरीके का त्याग कर दो, धीरे-धीरे आकर्षण हटता जाएगा। एक तरफ अपने तरीके से चाहिए भी, और सीधा मोह-माया से छूटना भी चाहते हो — मन तो एक ही है, दो जगह कभी लग नहीं सकता। तरीके में फंस गए हो, तरीके का उपयोग करके अपने आप को निकालो।
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