प्रश्नोत्तर P14-0093 · भाग 14
गुरु जी, जो फंसे हैं क्या यह भी अस्तित्व की इच्छा है, या विकास-क्रम चल रहा है? मुक्ति तो निश्चित है, पर मुक्ति के बाद फिर यह चक्र शुरू होगा — फिर यह लीला क्यों?
इसका जवाब तो जिसने सृष्टि का निर्माण किया वह देगा। मानव के अलावा जितने जीव हैं, वो कहां फंस रहे हैं — वो अपने स्वभाव में भोग भोग रहे हैं, भोजन कर रहे हैं। मानव को कर्ता का अधिकार दिया है, मानव ही फंसा है। आप समझ के फंसे हो, अस्तित्व ने आपको नहीं फंसाया; अगर अस्तित्व ने फंसाया होता तो वह कभी नहीं कहता कि अपने आप को छुड़ा लो। आपने अपने आप को फंसाया है और आप ही छुड़ा सकते हो। अगर अस्तित्व के चाहने से कोई छूटता, तो महापुरुषों को चिल्ला-चिल्ला के बोलने की क्या जरूरत थी कि यह मत करो, ऐसे चलो? आप फंसे हो, अपने आप को निकाल लो — यही बुद्धिमानी, यही ज्ञान है।
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