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प्रश्नोत्तर P14-0103 · भाग 14

गुरु जी, संतों ने कहा है कि इतनी तपस्या करो कि गुरु को ढूंढने की जरूरत ना पड़े, वो खुद मिल जाएंगे — पर कैसे पता चलेगा कि वो खुद मिलने आए हैं?

या तो आप उन्हें ढूंढो, या आप में ऐसी सामर्थ्य, ऐसी व्याकुलता, ऐसी जिज्ञासा हो जाए — जैसे रामकृष्ण परमहंस को तोतापुरी ने ढूंढ लिया, लेकिन उनका प्रयास भी देखिए। आपकी इतनी तड़प होनी चाहिए कि परम स्थिति के लिए सब कुछ छोड़ सकें, और कुछ नहीं चाहिए यह भाव हो। कैसे पता चलेगा — जब प्यास लगी, पानी मांगा, और सामने वाले ने पानी दिया तो समझ में आ जाता है; रस या दूध दे दे तो प्यास नहीं बुझी, यह भी समझ में आ जाता है। समझना उनको नहीं है, समझना यह है कि मुझे जो चाहिए था वह मिला कि नहीं। हम सामने वाले का बैकग्राउंड जांचने में लग जाते हैं — ब्रांडेड गुरु चाहिए, कई लाख शिष्य वाला। गुरु ज्ञान का प्रतीक होता है — तेरा-मेरा से जो अहंकार धारण किया, उससे मुक्त होने का मार्ग जो बताए वह गुरु है। पानी एक ही जगह से आता है, नल निमित्त अनेक होते हैं। जो आपके प्रश्न का उत्तर दे दे, वह उसकी सामर्थ्य है, बात खत्म।

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वीडियो: ईश्वर सर्वव्यापी है इसका क्या मतलब है / #ईश्वर #सर्वव्यापी · 2024-04-10