प्रश्नोत्तर P14-0132 · भाग 14
ये मज़दूर लोग बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनाते हैं, सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं, फिर भी दो वक्त का खाना ढंग से नहीं मिलता — ये भी तो है प्रभु?
इसमें समझदारी की बात करो, भावनाओं में मत बहो। उनकी पगार कितनी है? पाँच सौ रुपये रोज़। पाँच सौ में आदमी अच्छे से खा के, जी के, सो के सेविंग कर सकता है। लेकिन जब आदमी पाँच सौ कमा के चार सौ की दारू पिएगा या दो सौ का गुटखा खा के थूक देगा, तो घर क्या जाएगा? जितनी आपकी कैपेसिटी है, जितना कमाते हो, उस हिसाब से खर्च करो और उतने ही लोगों को जोड़ो; बाकी सब भी काम करें। सरकारी में आठवीं तक शिक्षा फ्री है, बच्चे पढ़ने वाले होने चाहिए। जब सोसाइटी मेंटेन करोगे तो परेशान ही रहोगे। बड़ा घर पड़ोसी को नीचा दिखाने के लिए चाहिए, दो पेटी साड़ी चाहिए, बीस जोड़ी कपड़े — जबकि दो-तीन जोड़ी बहुत हैं। गहने बाहर पहन के जाते हैं लोगों को आकर्षित करने के लिए कि मैं कुछ हूँ। जब जिंदगी को सच में जियोगे तो कोई तकलीफ नहीं, जब मान के लिए जियोगे तो तकलीफ ही तकलीफ पैदा होगी। दिखावा करोगे तो एक से बढ़कर एक है, आपसे बड़ा आ गया तो तुरंत राग-द्वेष और दुख आ जाएगा।
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वीडियो: कर्ता कौन है, अकर्ता कौन है ?| Who is the Doer ? Who is the Non-Doer ? #yogijikasatsang · 2026-05-18