प्रश्नोत्तर P14-0149 · भाग 14
आपके पास हर प्रश्न का जवाब है, और सब सटीक है — ये कैसे?
प्रत्यक्ष है ना। बचपन से सुन रहे थे कि अर्जुन की तरह ध्यान हो, समर्पण हो, राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा और कर्ता के भाव से मुक्त हो जाओ — ये कहना बड़ा आसान है, लेकिन छूटे कैसे? प्रत्यक्ष ज्ञान में यह बताया जाता है कि छूट कैसे जाए। जैसे आपने कहा कर्ता का भाव कैसे छूटे, तो हमने कहा अनुमान लगाना छोड़ दो — ये आपके बस में है; कर्ता का भाव बनेगा ही नहीं, छोड़ना भी नहीं पड़ेगा। गीता में भी कहा कर्ता का भाव छोड़ दो, लेकिन छोड़ें कैसे, ये समझा नहीं पाया किसी ने। मैंने देखा लोगों ने घुमा-फिरा के बताया है, इसलिए मैंने सीधा-सीधा खोजा, और उस ज्ञान में मैं भी ना रहूँ — ऐसा ज्ञान।
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वीडियो: कर्ता कौन है, अकर्ता कौन है ?| Who is the Doer ? Who is the Non-Doer ? #yogijikasatsang · 2026-05-18