प्रश्नोत्तर P15-0020 · भाग 15
गुरु जी, जप से कुछ असर नहीं होता, इसका मतलब मेन चीज़ कर्म से होती है?
मुँह से शब्द निकल रहा है, ये कर्म नहीं हुआ। भूख लगी है तो जप करने से भोजन मिल जाएगा, या भोजन पका के खाने से? शरीर ही तो साधन है उस साध्य तक पहुँचने का; भूखे भजन न होय गोपाला। जप जिस भाव से करते हो — भाव में ईश्वर का वास है; जैसे वाल्मीकि जी "मरा मरा" से शुरू करके तभी उठे जब उपलब्धि हो गई। यहाँ तो लोग मिनट गिनते हैं कि इतने मिनट में इतनी माला। अगर आपने बेईमानी का त्याग कर दिया, ईमानदारी अपना ली, सत्कर्म कर रहे हो, तब जप करने का मतलब है। जैसे एक शराबी सौ रुपये कमा के शराब पी के घर पहुँच जाता है, उसे हजार दे दो तो नाली में पड़ा रहेगा; वैसे ही बेईमानी में जीवन है और जाप करोगे तो और पतन हो जाएगा। पहले ईमानदारी और सत्कर्म अपना लो, फिर जाप करो। ये आवेश-जज़्बात का मार्ग नहीं है, आराम-आराम से समझ के यात्रा करो।
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वीडियो: इतनी पूजा पाठ भक्ति करते हैं लेकिन दुख क्यों आते हैं ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #आध्यात्म · 2026-08-10