प्रश्नोत्तर P15-0104 · भाग 15
ईमानदारी मुक्ति, बेईमानी बंधन — ये सब जान लेने के बावजूद भी, जब तक सत्कर्म नहीं करोगे, ताला खुलेगा नहीं?
ताला तो खुल गया — ईमानदारी में आते ही। अब आप अंदर आ सकते हो, लेकिन बाहर से धीरे-धीरे अपने आप को छुड़ाने के लिए सत्कर्म करना है। इसीलिए मैं कहता हूँ पहले ईमानदारी, बाद में सत्कर्म; ये बारीकी समझनी है। अगर ईमानदारी नहीं अपनाई तो आप कितना भी सत्कर्म करो, उसका कोई मतलब नहीं, ताला ही नहीं खुला, गेट के बाहर ही दौड़ते रहोगे; क्योंकि आपकी कमाई कैसी है? ईमानदारी तो अपनानी ही है, फिर उस कमाई से सत्कर्म होना चाहिए। चार वेद, अठारह पुराण, छह शास्त्र कर लो, जब तक बेईमानी से ईमानदारी में नहीं आओगे, कुछ हो ही नहीं सकता।
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वीडियो: इतनी पूजा पाठ भक्ति करते हैं लेकिन दुख क्यों आते हैं ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #आध्यात्म · 2026-08-10