आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P15-0151 · भाग 15

गुरु जी, क्या अध्यात्म और धर्म दरिद्र और गरीब रहना सिखाता है?

नहीं, संपन्न रहना। संपन्न लोग आध्यात्म की तरफ बढ़ पाते हैं; दरिद्र तो बस संसाधनों में, लालच में ही भटकता रहता है। संपन्न व्यक्ति आध्यात्म की खोज में निकलता है। तीन तरह के साधक अपने घर से निकलते हैं — एक स्वभाव में, एक कुभाव में, एक अभाव में। स्वभाव में जो निकलता है वह खोजी होता है, आंतरिक रूप से संपन्न होके निकलता है। कुभाव में जो निकलता है वह झगड़ा-वगड़ा करके निकलता है, और अभाव में जो निकलता है वह किसी कमी की वजह से निकलता है। अभाव वाले पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन में लग जाते हैं, और कुभाव वाले तंत्र विद्या की तरफ चले जाते हैं — ये दो तो जगत में भटकते रहते हैं। स्वभाव वाले अपने आप को निर्विकार कराते हैं, और वही अपने आप तक पहुंचते हैं। बस यही यात्रा है। आप देखो आप किस में निकले हो।

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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11