प्रश्नोत्तर P15-0177 · भाग 15
महाराज जी, संपन्न होने के लिए तो सारी दुनिया दौड़ लगा रही है। जो ईमानदारी से चलता है, उसमें उतनी प्रतिद्वंद्विता की भूख नहीं रह जाती; तब क्या उसकी गरीबी आत्मज्ञान में बाधा बन जाएगी?
नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। गरीबी आप किसे समझते हैं? गरीब तो वो होता है जो अमीर बनने के लिए बेईमानी का उपयोग कर रहा है, अनेक लोगों का शोषण कर रहा है — सबसे ज्यादा गरीब तो वो है। वो गरीब है तभी तो शोषण कर रहा है; भूखा है, और इतना भूखा है कि राक्षस बन गया है। तो गरीब वो है जिसे आप अमीर समझ रहे हो, अगर वो बेईमानी से जी रहा है। संपन्न तो वो है जो ईमानदारी से जीवन जी रहा है। संपन्नता की परिभाषा ही आप लोगों ने बदल दी। संपन्न कौन है? ईमानदार। ईमानदार अपने आप में है, बेईमान बाहर है।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11