आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P15-0188 · भाग 15

गुरु जी, दृष्टा और दृश्य को समझाइए।

दृश्य हमारे सामने हैं और दृष्टा हम हैं। बस इच्छा-अपेक्षा नहीं है तो हम उसमें फंसे हुए नहीं, उससे अलग हैं; और इच्छा-अपेक्षा है तो हम उसमें लिप्त हैं। बस बात खत्म। (और बैठकर ध्यान कैसे करें? कर्म में इतना ध्यान रखो कि कोई गलती ना हो जाए; और बैठकर ध्यान करना है, तो बस बैठ जाओ, कुछ ना करो।)

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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11