आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P15-0195 · भाग 15

गुरुदेव, सबकी शरीर की स्थिति अलग-अलग है, सबकी मनोदशा अलग है — फिर आप कैसे कह सकते हैं कि एक रोटी पे सबका शरीर एक जैसा होगा?

शरीर वही है, मिलाजुला के। मनोदशा अलग हो सकती है। तुम यहां सुई मारोगे तो मेरे यहां भी लाल निकलेगा, तुम्हारे यहां भी — मनोदशा से ब्लड का कलर नहीं बदल जाएगा। उपवास रख लो तो तुम्हारा शरीर तुमको खाने लगेगा। झापड़ मारो — एक चिल्ला देगा, एक नहीं चिल्लाएगा, लेकिन चोट दोनों को लगी। पहले भूख लगेगी, बाद में प्यास; किसी को सोकर उठते ही भूख लगे, किसी को शाम तक, दो दिन बाद — लेकिन लगेगी; आप सह सकते हो, मैं नहीं सह सकता, बस इतना अंतर है। शरीर भोजन से ही बना है, इसमें मनोदशा काम नहीं करती। मनोदशा कर्म में काम करती है — जब हम बातचीत करते हैं और जब कोई काम का फैसला लेते हैं, उसमें मनोदशा बोल सकते हो। एक शब्द को हर जगह उपयोग मत करो, उसकी जगह है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: कोई प्रश्न ना होने के बाद कौन सा प्रश्न होना चाहिए ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-16