प्रश्नोत्तर P16-0005 · भाग 16
इतना पढ़ लिया कि पढ़-पढ़ के परेशान हो गया — ऐसा क्यों होता है?
ज्यादा अध्ययन भी आदमी को एकदम भटका देता है। ध्यान से सुनना: अगर आपके पास रोटी और सब्जी हो तो बड़े दिल से, अच्छे से खा लोगे। पर कई प्रकार की सब्जी, पुलाव, चावल, तंदूरी रोटी, नान, कई दालें हों, तो चांसेस हैं उस दिन तृप्ति नहीं होगी — आप डिसाइड ही नहीं कर पाओगे कि शुरू कहां से करें, भूखे भी रह सकते हो। ज्यादा चॉइस आदमी को परेशान कर देती है; ऐसे ही ज्यादा अध्ययन आदमी को परेशान कर देता है। इसीलिए कहा गया है कि शास्त्रों का अध्ययन गुरु के शरण में रह के करो, तो वह अध्ययन नहीं, अनुसरण करवाएगा। अनुसरण कर लोगे तो उसमें जीने लगोगे; अध्ययन में आदमी जी नहीं पाता, बस एक-दूसरे को पकड़ के सुनाता है। जितने विद्वान हैं, उनके घर वाले उनसे सबसे ज्यादा ग्रसित रहते हैं, क्योंकि जो भरा है वह निकलना चाहिए — ना तो निकल रहा है, ना अंदर जा रहा है। गुरु के शरण में रह के सरलता तो सीखी नहीं, समर्पण हो नहीं पाए, तो अपने मान के लिए बोलते हैं, उनका मान खड़ा हो जाता है। सुनाने के पहले उससे पूछो कि सुनना भी चाह रहे हो; इच्छुक हो तो ठीक, नहीं तो मुंह बंद करके आराम से बैठ जाओ।
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वीडियो: कोई प्रश्न ना होने के बाद कौन सा प्रश्न होना चाहिए ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-16