प्रश्नोत्तर P16-0141 · भाग 16
गुरु जी, आज हमें ऊर्जा के बारे में बताइए — एनर्जी, ऊर्जा कैसे काम करती है?
देखिए, पहले हमें बाहरी जगत की ऊर्जा को समझना है, तब हम आंतरिक समझ पाएंगे — जैसे पढ़ना सीखना है तो सीखता अंदर वाला है, लेकिन पहले बाहर से सहायता लेनी पड़ती है। इस संसार की पहली ऊर्जा है अर्थ, जिसे पैसा कहते हैं, वैभव; उसी से हर वस्तु आसानी से खरीदी जाती है — सामान के बदले सामान मांगो तो कोई नहीं देगा, पैसे से लो तो कोई भी दे देगा। उसके बाद व्यक्ति की ताकत: सामने हमसे मजबूत आदमी हो तो उस पर हमारा गुस्सा काम नहीं करता, उससे गलती हो भी जाए तो हमारी ऊर्जा उस तरफ नहीं जाती; लेकिन हमसे कमजोर हो, अनजाने में गलती हो जाए, तो भी हम उस पर जल्दी हावी हो जाते हैं। फिर व्यक्ति की खूबसूरती — यह भी ऊर्जा है। इन ऊर्जाओं का प्रभाव है, जिसे आवरण कहते हैं। समाज में अमीर आदमी शराब पीता है तो उसे रईस कहते हैं — अपने दरवाजे बुलाकर पिलाते हैं, चखना देते हैं, गिलास भी धोते हैं, और लोगों को बताते हैं कि हमारे यहां ये आए थे; वही गरीब आदमी दरवाजे से दूर भी जा रहा हो तो परिवार वाले कहते हैं "देखो बेवड़ा जा रहा है"। शराब तो दोनों ने पी है, लेकिन एक के पास वैभव की ऊर्जा है, एक के पास कम। लेन-देन में, जीवन जीने में इन ऊर्जाओं की जरूरत पड़ती ही है — आप कितने भी महान, सज्जन आदमी हो, ट्रेन का टिकट पैसे से मिलेगा, सज्जनता से नहीं; कितने भी दुर्जन हो, पैसा दो और एसी में सोकर जाओ। इसलिए सामर्थ्यवान बनो — पैसा, शरीर और बाहरी ज्ञान से। इस ऊर्जा में लोग उलझे हुए हैं। ऊर्जा को नहीं छोड़ना — आप कितने भी त्यागी बन जाओ, इसके बगैर काम नहीं चलेगा, जीवन जीने के लिए वस्तुओं और संसाधनों की जरूरत है; छोड़ना है उसका प्रभाव — प्रभाव देना और प्रभाव लेना। जो ऊर्जा मिली है उसका सदुपयोग करो। सामने वाला कितना भी वैभव वाला हो, गलत काम कर रहा है तो उसकी गलती को सही मत बोलो; बेवड़ा बोलो तो दोनों को बोलो, या किसी को मत बोलो; एक को पिला रहे हो, एक को भगा रहे हो — ऐसा करोगे तो राग-द्वेष में फंस जाओगे। जब प्रभाव देने और लेने का भाव हटा दोगे, तब आपकी आंतरिक ऊर्जा जागेगी — लेकिन तब, जब आप ईमानदारी से जीवन जीते हुए सत्कर्म में लगे रहोगे। ऊर्जा को समझने के लिए भी ऊर्जा चाहिए — बुद्धि का स्तर भी ऊर्जा है: कोई बहुत मेहनत करता है उसे याद नहीं होता, कोई एक-दो बार पढ़ता है, याद हो जाता है। शरीर की ऊर्जा, बुद्धि की ऊर्जा — सब कर्म से मिली है; बाहर भी कर्म से मिलता है और अंदर भी कर्म से मिलेगा।
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वीडियो: ऊर्जा के बारे में रहस्यमय ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #ऊर्जा रहस्यमय #ज्ञान #satsang · 2024-08-02