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प्रश्नोत्तर P16-0145 · भाग 16

अगर किसी मानव के अंदर तामसिक और राजसिक ऊर्जा जन्म-जन्मांतर के कर्मों से पहले से इकट्ठी होकर आ रही है, तो क्या उसे खत्म किया जा सकता है?

हां, सात्विक में, परोपकार में लग जाए तो वह हट जाएगी — धीरे-धीरे खत्म होगी, धीरे-धीरे उसका नाश होगा। जैसे मान लीजिए आपको और इनको एक-एक लाख रुपये दिए गए; इन्होंने खर्च नहीं किया और आप लगातार फटाफट खर्च कर रहे हो, तो आपका खत्म हो जाएगा। वैसे ही जैसे-जैसे सत्कर्म करोगे, वैसे-वैसे ये साफ होंगे — पुण्य भी, पाप भी; पॉजिटिव भी, नेगेटिव भी, दोनों का नाश होगा। सात्विक ऊर्जा अलग है, वह परोपकार से होती है। दोनों जाएंगी तभी आप अपने आप से मिल पाओगे, तब अंदर से ऊर्जा जागृत होगी। अभी तो आप बाहर की ऊर्जा में फंसे हो — पॉजिटिव-नेगेटिव दो में से एक भी रहा तो आप यहीं फंसे हो। "अपने को तो पॉजिटिव एनर्जी चाहिए" — तो सात्विक ऊर्जा लो ना, परोपकार में, सेवा में लग जाओ। उसे सात्विक ऊर्जा बोलो, उसे पॉजिटिव नहीं बोल सकते; समझने के लिए बोल सकते हो। तीन प्रवृत्तियां होती हैं — मानव प्रवृत्ति, देव प्रवृत्ति, राक्षस प्रवृत्ति — तो तीन प्रकार की ऊर्जा हुई। दो ऊर्जा संसार की हैं — पॉजिटिव और नेगेटिव — वे संसार के लिए कार्य करती हैं; और एक ऊर्जा सात्विक है, अपनी है, अपने अंदर है — उसे अपने आत्म से जागृत करना है। अभी तक तो दो ऊर्जाओं में ही अटके पड़े हो; नेगेटिव छोड़कर पॉजिटिव में आ गए, पर उसे भी छोड़ना है। कोई भी एनर्जी पकड़े रहोगे तो बाहर ही हो।

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वीडियो: ऊर्जा के बारे में रहस्यमय ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #ऊर्जा रहस्यमय #ज्ञान #satsang · 2024-08-02