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प्रश्नोत्तर P16-0177 · भाग 16

इंसान कहीं ना कहीं खाली है, कमजोर है, अपनी इंद्रियों का गुलाम है — आंख, नाक, कान, इन सबका अपना रस है, और ये हमें डुबा लेती हैं। वह अपने आप उठ नहीं पाता, एक रास्ता छोड़कर दूसरे में गिर जाता है। तो क्या ये इंद्रियां ही हमें डुबा लेती हैं?

ये नहीं डुबाती — इसी पे रुकना पड़ेगा। हम इसके द्वारा डूबते हैं। अगर यह डुबाती तो जितने महात्मा थे उन्हें उपलब्धि कैसे होती? उनके पास भी तो ये था। इसको निमित्त बना के हम डूबते हैं। सारी जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए।

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वीडियो: खुद को जांच ने का तरीका #योगी · 2026-02-20