प्रश्नोत्तर P16-0190 · भाग 16
(लाइव) गुरुजी, अपने आप को कैसे जानें?
बस राग-द्वेष से अपने आप को छुड़ा लो। देखिए, एक प्रश्न समाज में बहुत विख्यात हो गया है इस समय — मैं कौन हूं? जब आप पूछते हो ना, तो दूसरे को ही नहीं पता है तुम कौन हो, लेकिन कहता है मैं बताऊंगा। अरे, आपको पता है मैं कौन हूं। अगर आपको ठीक लग रहा है तो ठीक है, नहीं तो उससे हटने के लिए प्रयास करिए। सबको पता है मैं कौन हूं, आप इसे समझने का प्रयास करिए — पूछने जाते हो तो दूसरा कोई फायदा उठा लेता है। आपको अगर लग रहा है "मैं कौन हूं", तो तुमसे "मैं" पैदा हुआ है; उसको गिराने के लिए — तुम जो पांचों इंद्रियों द्वारा शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श का रसपान कर रहे हो, वह रसपान छोड़ दो। तुमसे "तुम" छूट जाओगे और बचेगा परम सत्य। बहुत सरल है। इसलिए आप सीधा पूछो ना — मेरा जीवन अशांत है, मैं पीड़ा में हूं, इससे कैसे छुटकारा पाऊं, इसके लिए मुझे मार्ग बताओ। पूछते हो मैं कौन हूं, तो लोग बोल देते हैं तुम आत्मा हो, भगवान हो, पवित्र आत्मा हो — और तुम जीवन भर उन्हीं शब्दों को ढोते रहते हो; उसका ना बोध होता है ना ज्ञान होता है। एक सहारा चाहिए जीने के लिए। तो मैं यही कहना चाहता हूं — प्रत्यक्ष में जियो। अभी आपका जीवन अशांत है, तो इस अशांति से मैं कैसे छुटकारा पाऊं — राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा, कर्ता से मुक्त होऊं — इसके लिए काम करो। और इसके लिए अगर काम किए ना, तो अहम गिर जाएगा, बचेगा परम सत्य। बस बात खत्म।
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वीडियो: अब जाऊं कहां / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-16