प्रश्नोत्तर P16-0192 · भाग 16
(लाइव) अगर हम ना जाना चाहें, तो भी यहां कब तक अपने आप को रोक पाएंगे?
प्रभु, जाना तो पड़ेगा ही, क्या करेंगे। हमने तो अपने जीवन में, बचपन से जब से समझने लायक हुए, यही कहा कि परमात्मा, मरने के बाद अगर कुछ देना, जन्म देना, तो प्रेम की नगरी; और अगर नरक-स्वर्ग होगा तो मुझे स्वर्ग ना देना, हाथ जोड़ता हूं, मुझे नर्क देना — नर्क में मैं कुछ कर सकता हूं, स्वर्ग में सब सुखी लोग रहेंगे। और इस संसार में दुख चुना, क्योंकि आखिरी परिणाम दुख ही है। मैंने कहा, दुख चुनो, बात खत्म करो — चुनाव दुख का करो, क्योंकि आखिरी परिणाम दुख है। खत्म करो, कुछ बात ना रहे तुम्हारे पास, क्योंकि जब तक तुम्हारे पास कुछ है तब तक तुम यहीं पड़े रहो।
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वीडियो: अब जाऊं कहां / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-16