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प्रश्नोत्तर P17-0025 · भाग 17

जब मुझे डर लग रहा हो, उस वक्त मैं क्या भाव बनाऊं? क्या एकांत में चली जाऊं, या रोना आए तो क्या करूं?

इसमें समझ काम करती है। डर आया — पहले तो नहीं था, तो बाद में भी नहीं रहेगा; ये स्थिति-परिस्थिति के कारण आया है और चला जाएगा, तो मुझे इससे क्या मतलब। जैसे घर में मेहमान आ गया — एक-दो दिन हंगामा करेगा, चला जाएगा; घर तो मेरा है, उसका थोड़ी। वो परिचित है, तो उसका हंगामा झेल लेंगे — हंगामा भी इसलिए कर रहा है कि हम भी कभी उसकी जिंदगी में हंगामा किए। जब हम इसका कोई जवाब नहीं देंगे तो हंगामा कर-करके थक के चला जाएगा; अगर जवाब देता हूं तो हंगामा और तेज हो जाएगा। मुझे जवाब ही नहीं देना है — बस उसे देखते रहो, मेहमान चला जाएगा। प्रतिक्रिया ही मत दो; एकांत में भी मत भागो, क्योंकि भागना भी क्रिया होगी। आप जहां हो, जो अपना रूटीन का काम है, उसी में लगे रहो; उससे बचने का कोई साधन ना करो। बचने का साधन किया, करते ही वो हावी हो गया, क्योंकि आपने उसे वैल्यू दे दी — अब वो जल्दी जाएगा नहीं। अगर आप अपना काम करते रहते, तो उथल-पुथल करता, देखता कि रिस्पांस ही नहीं मिल रहा, तो भाग लेता। (आंसू आएं तो आने दो — "मैं थोड़ी रो रहा हूं", ये अंदरूनी समझ रखनी है।) आप वैल्यू नहीं दोगे तो धीरे-धीरे वो आना ही छोड़ देगा।

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वीडियो: आखिर तेरा क्या होगा ? #योगी · 2026-01-11