प्रश्नोत्तर P17-0031 · भाग 17
गुरु जी, ध्यान करने पर मैं शून्य में नहीं पहुंच पाता। जागने पर विचार कम आते हैं, मगर ध्यान करने बैठूं तो एक विचार जाता है तो दूसरा आ जाता है — ध्यान में विचारहीन कैसे हों?
विचारहीन अगर होना भी चाहते हो, तो फिर उठोगे तो विचारों में आ जाओगे। विचारों में राग-द्वेष ना हो, बस इतना ध्यान रखो। राग-द्वेष उठ रहा है तो क्यों उठ रहा है, उसकी क्या वजह है — उससे निकलो। विचारों को रोकने का प्रयास मत करो; विचार प्राकृतिक आते हैं। विचार से आप मुक्त नहीं हो सकते — जब तक जीवन है, विचार आते ही रहेंगे।
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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04