प्रश्नोत्तर P17-0080 · भाग 17
गुरु जी, सेवा और सत्कर्म में क्या अंतर है? सत्कर्म का मौका कैसे मिलता है?
सेवा से सत्कर्म तक आ जाओ — ऐसा मत छांट देना कि सेवा ना करो, सत्कर्म ही करो। सत्कर्म का मौका प्रकृति देती है, वह आपके बस में नहीं है; जब जरूरतमंद की सेवा में लगोगे तो धीरे-धीरे प्रकृति मौका देगी। जैसे आप भोजन लेकर गए, आदमी ज्यादा हो गए और आपके पास कम है — अब ऑप्शन बचा "मैं खाऊं कि इसको दूं" — उसी समय जो करोगे वह सत्कर्म है, बाकी सेवा है। या कम पड़ गया तो घर जाकर फिर ले आओ; आलस कर दिया तो सत्कर्म का मौका तुरंत चला जाएगा, वह रुकेगा नहीं, उसे देने वाले अनेक हैं। सेवा करते रहो, प्रकृति सत्कर्म का मौका देती रहेगी। और आत्मदर्शन हो गया तो आपके द्वारा जो भी होगा सत्कर्म ही होगा — उठना, बैठना, चलना सब — आप पाप-पुण्य से हट गए।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21