प्रश्नोत्तर P17-0090 · भाग 17
गुरु जी, जब हम किसी जीव को बिना कामना के भोजन कराते हैं तो अंदर से अच्छा लगता है, सुकून मिलता है — ऐसा क्यों होता है?
क्योंकि उस समय चाह चली गई — सीमित वाला खत्म हुआ और असीमित में आ गए, तो एहसास होता है, सुकून मिलता है। इसीलिए कहा गया — सर्वप्रथम भूखे को भोजन, प्यासे को पानी; अन्नदान महादान। लेकिन कहां? जहां जरूरत है वहां; जहां जरूरत नहीं वहां नहीं — ऐसा ना हो कि आपने अनाज दिया और वह सड़ रहा है। धन, तन, ज्ञान — यह सेवा जरूरतमंद को देना, जहां उसकी जरूरत और उपयोग हो।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21