प्रश्नोत्तर P17-0101 · भाग 17
गुरु जी, जो हो रहा है उसे हम स्वीकार क्यों नहीं कर पाते? क्या सब पहले से तय है?
हमारे करने से इस दुनिया में कुछ नहीं होता, ऐसा लगता है कि हम कर रहे हैं, लेकिन होता वही है जो होना है — कुछ समय पहले मैं नहीं था, कुछ समय बाद नहीं रहूंगा; जो विधि के विधान में लिखा है वही होता है। हम फिक्स करने में फंस गए हैं, और जो एक्चुअली हो रहा है उसे स्वीकार नहीं करते — बस यही तकलीफ है। जब तक कुछ बनना है तब तक स्वीकार हो ही नहीं सकता; जब कुछ नहीं बनना, तब स्वीकार होगा — करना नहीं पड़ेगा, हो जाएगा। प्रभु की सत्ता, प्रभु का इंतजाम स्वीकार करना पड़ेगा। कुछ चाहिए, कुछ बनना है, तो कितना भी करोगे स्वीकार होगा नहीं, और जबरदस्ती स्वीकार करोगे तो उसमें अहम भाव होगा।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21