प्रश्नोत्तर P17-0124 · भाग 17
गुरु जी, कई संत जानबूझकर अपने आप को ऐसी स्थिति में डालते हैं कि लोग उन पर क्रोध करें, ताकि देखें कि उनका अपना व्यवहार क्या रहता है — क्या ऐसा होता है?
ऐसा उनका भाव नहीं रहता। संत का भाव बस इतना रहता है कि लोग हमारी बात को समझ जाएं — बात खत्म। वे आजमाने से मुक्त हो चुके हैं, उन्हें अपने आप को आजमाने की क्या जरूरत है?
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21