आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P17-0128 · भाग 17

गुरु जी, अज्ञान मिटाने के लिए ज्ञान की जरूरत होती है, और जब सत्य का बोध हो जाता है तब ज्ञान की गठरी भी त्यागनी पड़ती है — क्या यह सही है?

बोध ऐसे होता है जैसे उजाला आया और अंधेरा गया। ऐसा नहीं कि पहले उजाला आए और उसके बाद अंधेरा जाए — जैसे-जैसे उजाला आ रहा है, वैसे-वैसे अंधेरा जा रहा है; उजाले का आगमन ही अंधेरे का जाना है। तो बोध के समय बाहर का ज्ञान, बाहर की जानकारी — उससे व्यक्ति मुक्त हो जाता है, तभी तो आत्मा का बोध होता है।

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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21