प्रश्नोत्तर P17-0132 · भाग 17
गुरु जी, जो कुछ प्राप्त है उसे छोड़ना है — तो छोड़ते समय दुख हो तो? और जिसके पास पहले से अभाव है, उसका क्या?
जितना प्राप्त है उसे छोड़ना ही आत्मा है — हर चीज से आसक्ति छोड़नी है। अगर छोड़ते समय दुख हो रहा है तो वो छूटा ही नहीं। जिसके पास अभाव है, वह छोड़ा हुआ नहीं है — वह तो अभाव को पूरा करने में लगेगा। जो संपन्न है, उसे देखना चाहिए कि इन चीजों ने मुझे कहां पहुंचा दिया। गाड़ी का उपयोग करते रहो, पर गाड़ी में जो टशन लोगों को दिखाने के लिए था, उस भाव को छोड़ना है — उसके द्वारा अपने आप को खड़ा करना छोड़ना है। विपरीत परिस्थितियों में जैसी व्यवस्था हो उसका उपयोग कर लेना, वहां यह सिद्ध नहीं करना कि मैं बड़ा हूं, "मैं तो ऐसे नहीं रह सकता"। जो हैबिट, जो कंफर्ट जोन, जिन सुविधाओं के हम आदी हो गए, उस भाव को ही छोड़ देना है — विपरीत परिस्थिति में ही आपकी स्थिति का पता चलता है।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21