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प्रश्नोत्तर P17-0154 · भाग 17

गुरु जी, आगे जा नहीं सकते, थक चुके हैं, और पीछे लौटें तो किस आधार पर — यह भी पता नहीं; ऐसी स्थिति में क्या करें?

जैसे सांप-छछूंदर की कहावत है — सांप ने छछूंदर को मुंह में ले लिया, निगले तो मर जाए, उगले तो अंधा हो जाए — तुम वहीं खड़े हो। तुम इस भवसागर में बीच में उतरे थे, किसी स्टेशन पर नहीं — न शुरुआत का पता, न अंत का; अब जहां उतरे थे वहां भी नहीं रहे, जैसे सौ साल पहले के पूर्वज लौटें तो अपना घर न ढूंढ पाएं। इसलिए परेशान और अशांत हो। अब बस इतना है कि न आगे जाना है न पीछे — स्थिर होना है, अपने मूल केंद्र में आना है; वह केंद्र कोई जगह नहीं, स्थिति है, और वह तुम खुद हो। इसीलिए यहां ऐसा नियम है कि तुम्हें कुछ प्राप्त नहीं होगा — प्राप्त करोगे तो आगे जाओगे; प्राप्त नहीं होगा तो पिछला खत्म होगा, और एक दिन अपने मूल केंद्र में आ जाओगे। अभी छुड़ाने की यात्रा है; केंद्र में आने के बाद मूल की यात्रा होगी।

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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21