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प्रश्नोत्तर P17-0172 · भाग 17

गुरु जी, सत्य वचन सुनकर अगर पीड़ा हो, तो क्या समझ लेना चाहिए कि हमारा मन ही पापी है?

नहीं, मन नहीं — हमारे द्वारा पाप कर्म हुए हैं। मन न पापी है, न अच्छा है, न बुरा। हमारे द्वारा अपराध हुआ है, तो अब अपराध मत करो, पाप मत करो, सत्कर्म करो। मन को मत बोलो, मन सिर्फ निमित्त है — जैसे मोबाइल या कंप्यूटर में एरो (कर्सर); उसके द्वारा सब खोल सकते हो पर उसकी अपनी कोई जगह नहीं। मन शरीर के लिए काम करता है। आप जो चाहते हो वही करते हो — अब देख लो, आप क्या चाहते हो।

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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21