प्रश्नोत्तर P17-0197 · भाग 17
गुरु जी, अगर मैंने ठान लिया कि मुझे यहां से निकलना है, तो पुराने लेन-देन, पुराने लेनदार कैसे सामने आते हैं और उनकी भरपाई कैसे हो?
जैसे आपको कोई एरिया छोड़ना है और आपने अनाउंस कर दिया, तो जितने लेनदार हैं सब आ जाएंगे — मेरा देकर जाओ। कोई प्रॉपर्टी ले लेगा, कोई सामान, कोई कुर्सी; कम पड़े तो कहोगे जहां जा रहे हैं वहां से भेज देंगे। वैसे ही आपने प्रकृति में चिल्ला दिया कि अब हम निकलना चाहते हैं, तो सारे लेन-देन वाले याद आ रहे हैं, बार-बार चिंतन में आ रहे हैं, सूक्ष्म रूप से दिखने लगा है कि किसका कैसे उपयोग किया। अब सत्कर्म करोगे, प्रकृति के काम में सहयोग करोगे, तो भरपाई होगी — अलग-अलग रूप में लोग आएंगे और अपना लेकर चले जाएंगे। सत्कर्म में आप एहसानमंद नहीं बनते, कोई उम्मीद नहीं रखते — वहां सिर्फ देना है, लेना नहीं; प्रकृति अपना हिसाब अपने तरीके से ले लेती है। जितना सत्कर्म आपके द्वारा हो, समझ लो कि बड़ी तेजी से यात्रा हो रही है। पर जरा सा इधर-उधर हुए तो सत्कर्म ही छीन लिया जाएगा, क्योंकि पीछे लंबी लाइन लगी है — तुमने मौका मांगा था इसलिए दिया गया। इसलिए कहता हूं, उपयोग हो जाओ; जिस दिन पूरी भरपाई हो जाएगी, बात खत्म हो जाएगी।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21