प्रश्नोत्तर P18-0004 · भाग 18
गुरु जी, आज अध्यात्म में भी "मेरा गुरु ठीक, उसका गुरु खराब" — एक-दूसरे की निंदा होती है, और कहीं-कहीं गुरु के पांव धोकर पानी पिलाया जाता है। गुरु क्या है?
गुरु मेरा-तेरा होता है क्या? गुरु तो ज्ञान का प्रतीक है, गुरु तत्व है — शरीर नहीं, शब्द है, और उन शब्दों में ऊर्जा है। जैसे नल से पानी आता है, नल तो निमित्त है; पूरे विश्व में पानी एक ही जगह से आता है। इसलिए गुरु दो हो ही नहीं सकते — शरीर अनेक हो सकते हैं, जैसे नल अनेक हैं। गुरु का मतलब है जो तेरा-मेरा से धारण किए अहंकार से मुक्त करा दे — गुरु कोई व्यक्ति विशेष नहीं। इतिहास में कोई गुरु अपने शिष्यों को पांव धोकर नहीं पिलाता था। प्रथम गुरु मां-बाप हैं — कोई मां-बाप अपने बच्चे को पैर धोकर पिलाता है क्या? वह सीने से लगाता है और चाहता है कि बच्चा उससे भी ऊपर जाए। गुरु ऐसा होता है।
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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25