प्रश्नोत्तर P18-0039 · भाग 18
गुरु जी, "कुछ बनना" और "कुछ समझना" में क्या अंतर है?
जब तक कुछ बनना है, आप संसार में होते हो और दायरे में जीने लगते हो — आपका समझना भी दायरे में होगा; बनने में आप दूसरों को समझते हो, क्योंकि उनके लिए बनना है, और ऐसे ही भटकते रहते हो। जब बनना नहीं, कुछ करना है, तब आप प्रकृति के साथ होते हो और अपने आप को समझने लगते हो। मुझे बनना नहीं था, समझना था, जीना था। आज भी अपना आसन, खाट खुद उठाता हूं, भोजन बनाता हूं, बर्तन मांजता हूं — मैं अपाहिज नहीं; अपाहिज होता तो प्रकृति किसी को भेजती। मैं अपने जीवन का हिस्सा आपको नहीं बनाना चाहता; आप जिसके लिए आए हो, वह करो। मुझे न संन्यासी बनना था, न गृहस्थ — मैं बस जीना चाहता था।
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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25