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प्रश्नोत्तर P18-0046 · भाग 18

गुरु जी, मैं ध्यान हटाकर सिर्फ नाम पर केंद्रित होकर निरंतर नाम जप कर रहा हूं और सोच को रोक रहा हूं — क्या यह सही है? इसका क्या परिणाम होगा, या यह भटकाव है?

देखो आप नाम जप किस स्थिति में और किस भाव में कर रहे हो। ध्यान और विचार रुके नहीं, ध्यान अब नाम पर, इष्ट पर चला गया, क्योंकि आपने अपने आप को उसकी जरूरत बता दी — जैसे नशा छोड़ने के बाद भी मन नशे पर जाता है, क्योंकि शरीर को आदत दे दी। अब दो में से एक भाव है — या तो नाम जप के सहारे भौतिक जगत का कुछ पाना चाहते हो, या निर्विकार होना चाहते हो। नाम जप से लाभ तो है, लेकिन अगर आप ईमानदार हो तब ठीक, ईमानदार नहीं हो तो नाम जप से पतन होगा — कितने राक्षसों ने नाम जप से प्रसन्न करके शक्ति इकट्ठा की और फिर अपना पतन कर लिया, क्योंकि वे बेईमान थे। ऊर्जा आएगी तो खर्च वहीं होगी जैसा कर्म करोगे। अपने आप से पूछो — मैं पूरी तरह ईमानदार हूं, हां या ना; परसेंटेज में मत जाना, परसेंटेज में गए तो खुद के साथ बेईमानी है। लोग सलाह देंगे कि नाम जप के सहारे धीरे-धीरे बेईमानी छूट जाएगी — नहीं, नाम जप के सहारे बेईमानी नहीं छूटेगी, ऊर्जा मिलेगी। बेईमानी छोड़कर, ईमानदारी अपनाकर नाम जप करो। जितने भी नाम जप से पहुंचे, उन्होंने पहले अपने गुरु के प्रति पूरा समर्पण किया — "मुझे कुछ नहीं चाहिए, मैं इस जीवन से थक चुका हूं, अपना आत्मिक कल्याण करना चाहता हूं" — और गुरु ने पूरी तरह जांचकर तब नाम दिया। आज तो पंजीरी की तरह नाम बांटा जा रहा है।

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वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03