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प्रश्नोत्तर P18-0062 · भाग 18

गुरु जी, सुगंध-दुर्गंध, सुनने, देखने, स्वाद और स्पर्श में गलती कहां होती है — कोई व्यंजन की खुशबू अच्छी आई और "अच्छी है" कह दिया, तो उसमें अपनी इच्छा कहां है?

अपनी इच्छा तब है जब आप किसी को बुरा बोल रहे हो — राग-द्वेष में फंस गए। गटर को बुरा बोलते हो कि उसमें दुर्गंध है, पर गटर का क्या दोष, उसे गंदा करने वाले तो हम ही हैं। दुनिया में जो भी वस्तु है, जैसी है वैसी सुगंध-दुर्गंध दे रही है — आप कौन होते हो तय करने वाले कि अच्छा है या बुरा? कुछ अच्छा है तो बुरा भी होगा, और यही अच्छे-बुरे का भाव राग-द्वेष में ले जाता है। जरूरत है तो ले लो, नहीं तो नहीं। कोई बोल रहा है तो वह अपने तरीके से बोल रहा है; आप कौन फैसला करने वाले कि अच्छा बोल रहा है या बुरा? कोई खूबसूरत, कोई बदसूरत — उसे भी उसी ने बनाया, उसका क्या दोष? स्वाद अच्छा-बुरा, स्पर्श कोमल-कठोर — इंद्रियां आपको उपयोग करने के लिए मिली थीं, अच्छा-बुरा बोलने के लिए नहीं; आप निर्णय में फंस गए, गड़बड़ी यहीं हुई। जैसे एक टैक्सी वाला रात भर गाड़ी चलाता है और कहता है कि रात में भी तो किसी को एयरपोर्ट-स्टेशन जाना है — दुनिया में सब अपनी-अपनी जगह ठीक है; गड़बड़ी तब है जब आप कहते हो यह ठीक है, वह ठीक नहीं। और आखिर तुम कौन हो — अच्छे या बुरे? घुमा-फिराकर फंस जाओगे। इसलिए न अच्छा, न बुरा — उपयोग करो और निकल लो।

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वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03