प्रश्नोत्तर P18-0100 · भाग 18
गुरु जी, ऊर्जा कितने प्रकार की होती है?
एक सात्विक ऊर्जा है, जिसे परोपकार कहते हैं; और एक पॉजिटिव और नेगेटिव ऊर्जा है। जब आप इच्छा-अपेक्षा में काम करते हो, तब पॉजिटिव-नेगेटिव ऊर्जा आती है; जब इच्छा-अपेक्षा से मुक्त होकर काम करते हो, तो वह सात्विक ऊर्जा है। सात्विक ऊर्जा परोपकार और निष्काम सेवा से जागृत होती है और निर्विकार होने में सहायता देती है। पॉजिटिव-नेगेटिव बाहर की ऊर्जा है — यह आपको बाहर से प्रभावशाली बनाती है, प्रभाव देने-लेने में ले जाती है और संसार में घुमाती है। सबकी अपनी-अपनी ऊर्जा और बल होता है — धन का बल, तन का बल, ज्ञान का बल और समझ का स्तर आपको आपके कर्म से मिला है।
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वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03