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प्रश्नोत्तर P18-0112 · भाग 18

गुरु जी, जिस भाव से हम मार्ग पर निकले थे, क्या वह बाद में बदल सकता है? अगर काम हमेशा उस भाव के अनुसार नहीं हो पाता तो क्या होता है?

बाद में भाव बदलता नहीं, यही तो बात है। जब आप निकलते हो, वह भाव आखिरी तक पीछा नहीं छोड़ेगा — यह ध्यान रखना। अगर वह भाव अंतरात्मा से उठा है, आपने बनाया नहीं, तो वह जाने वाला नहीं। काम उस भाव के अनुसार न हो तो वह भाव बीच-बीच में चोट करता रहता है, और चोट करते-करते आपको लाकर वहीं खड़ा कर देता है, फिर आपको वही करना ही पड़ेगा। जिस भाव से आप निकले थे वो मायने रखता है — अभाव में निकले, कुभाव में निकले या स्वभाव में। हम इस मार्ग में स्वभाव में निकले थे, शौक से; आंतरिक रूप से संपन्न थे। हर हाल में शरीर छोड़कर जाना है — अपने लिए जियो या समाज के लिए — तो जब जाना ही है तो अच्छे तरीके से उपयोग हो जाओ।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22