आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P18-0132 · भाग 18

गुरु जी, क्या हम जब भी किसी से बात करते हैं, उसमें लेनदेन होता है? माता-पिता से बात करने में तो हम कुछ नहीं लेते।

हां, हम कुछ बात कर रहे हैं तो इसका मतलब लेनदेन हो रहा है; लेनदेन खत्म तो बात खत्म — शब्द निकलने के लिए कोई आधार चाहिए। शब्दों के पीछे हम कुछ देना चाहते हैं — स्नेह, प्यार; नहीं तो प्रार्थना भी नहीं उठेगी। माता-पिता की घर में सारी व्यवस्था कर दो, भोजन दो — वह शरीर को मिलेगा; पर आत्मिक सुकून तब मिलेगा जब आप उनसे बात करोगे, पूछोगे "आप कैसे हो" और वे पूछेंगे "बेटा कैसे हो" — "मैं ठीक हूं", यह आपने उन्हें दिया। बात न करोगे तो वे बेचैन हो जाएंगे। बिना बोले भी हम पांचों इंद्रियों से लेनदेन करते रहते हैं — पेड़ का सूखापन देखकर पानी देते हैं; नदी के पास बैठते हैं, गटर के पास नहीं, क्योंकि नदी हमें वह दे पा रही है जो हमें चाहिए।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22