प्रश्नोत्तर P18-0140 · भाग 18
गुरु जी, आपने यह ज्ञान कैसे पाया? क्या ज्ञान बिना गुरु के पाया जा सकता है, और जो गुरु ज्ञान देता है उस पर यकीन कैसे करें?
आपकी समझ में आए तो यकीन करना, नहीं तो निकल लेना। किसी से पता पूछा और उसकी भाषा समझ आए तो ठीक, नहीं तो किसी और से पूछो — बताने वालों की कमी नहीं। विश्वास प्रकृति की व्यवस्था की प्रथम सीढ़ी है, लेनदेन में करना ही पड़ता है; लेकिन विश्वास के बाद भी विश्वास करते रहना अंधविश्वास है। जैसे दो लोगों ने दुकानदार से सामान मंगाया, उसने नहीं लाया — जिसके पास पैसे थे वह दूसरी दुकान से ले आया; जो कमजोर था वह "कल आना" के आश्वासन पर बार-बार जाता रहा — यह अंधविश्वास है, कमजोरी की वजह से। अंधविश्वास को विश्वास का नाम मत दो; "विश्वास किया, धोखा मिला" — नहीं, वह अंधविश्वास था; विश्वास में धोखा नहीं होता, सब प्रत्यक्ष हो जाता है। ज्यादा समय दिया मतलब कहीं न कहीं आप कमजोर थे, नहीं तो तुरंत फैसला कर लेते कि तुम नहीं करोगे तो कोई और करेगा।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22