प्रश्नोत्तर P18-0142 · भाग 18
गुरु जी, मैं काम भाव (और भोग) छोड़ना चाहता हूं — क्या यह संभव है? कहां जाऊं?
कहां जाओगे? आपके शरीर में ही भोग और भोजन दोनों हो रहे हैं। आपके शरीर में कितने जीव हैं — इतनी देर में पता नहीं कितने पैदा हो गए, कितने मर गए; यथा पिंडे तथा ब्रह्मांड। भोजन कम कर दो तो शरीर शरीर को खाता है, पूरी चर्बी खा जाएगा। आप कहते हो मैं काम भाव छोड़ दूंगा — तुम अकेले छोड़ोगे, पता नहीं इसके अंदर कितने लाखों-करोड़ जीव काम भाव में, भोजन में, पैदा करने में लगे हैं। (तो भागना नहीं है — गुरु जी आगे बताते हैं: बस बेईमानी छोड़नी है, बाकी सब अपने आप हो रहा है।)
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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22