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प्रश्नोत्तर P18-0166 · भाग 18

गुरु जी, गीता के गूढ़ शब्द आम आदमी समझ नहीं पाता — पूरी गीता पढ़कर भी समझ नहीं आता कि "मेरा" और कर्ता से मुक्त कैसे हों। तो क्या करें?

इसीलिए कहा गया है कि शास्त्रों का अध्ययन किसी योग्य गुरु की शरण में होकर करना, क्योंकि वह अध्ययन के बाद अनुसरण कराएगा, और अनुसरण के बाद आप उसमें जीने लगोगे। आप सिर्फ अध्ययन कर रहे हो, इसलिए अहम भाव आ गया कि मैंने गीता पढ़ ली। गीता पढ़ने की नहीं, पीने की जरूरत है — वह संजीवनी है; प्रैक्टिकल की जरूरत होती है। इसलिए जीवंत गुरु का सानिध्य जरूरी बताया गया — किताब और गाइड में उत्तर तो होते हैं, पर तरीका नहीं लिखा जा सकता; शिक्षक कितना भी अच्छा हो, उसकी फोटो रखकर बच्चे नहीं पढ़ पाएंगे। विशाल पेड़ सूख गया और बगल में छोटा हरा पेड़ है — छाया चाहिए तो छोटे के नीचे बैठ जाना बुद्धिमानी है; "पूर्वज इसी के नीचे बैठे थे" कहकर सूखे पेड़ के नीचे पड़े रहोगे तो तुलना में फंस गए। जिसे सच में छाया चाहिए वह छोटे पेड़ के पास भी बैठ जाता है; जिसे नहीं चाहिए वह बड़ा, और बड़ा वृक्ष खोजता रहता है, और जिंदगी बीत जाती है।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22