प्रश्नोत्तर P18-0173 · भाग 18
गुरु जी, कभी-कभी ध्यान में ऐसी चीज की कल्पना आती है जिसे हमने कभी देखा ही नहीं — वह तो स्टोर नहीं थी, फिर कैसे आई?
नहीं था तो नहीं होता। आपसे पूछा जाए पिछले हफ्ते कौन सा कपड़ा पहना था — याद नहीं, पर कपड़ा पहना तो पक्का था, घर में मौजूद है। सुबह का खाया शाम को याद नहीं — तो कैसे कह सकते हो कि जो विचार आ रहे हैं वे आपके नहीं? बचपन से समझने लायक हुए तब से आप विचार इकट्ठा कर रहे हो और आपको पता ही नहीं। अभी यहां से जाओगे तो रास्ते में बोर्ड पढ़ोगे, ब्रेक मारोगे, किसी ड्राइवर पर "यह ठीक नहीं चला रहा" धारण कर लोगे — पांच इंद्रियां पांच कैमरे हैं, हर वक्त आप धारण कर रहे हो।
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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22