प्रश्नोत्तर P18-0188 · भाग 18
गुरु जी, ऋषि-मुनि और सत्संग कहते हैं कि यह जग मिथ्या है, दुखालय है, मृत्युलोक है, यहां से जल्दी निकलो — तो क्या यह सही है?
आप एक बात सोचिए — अगर यहां दुख है तो ऋषि-मुनि और संत-महात्मा उसी जगत में आनंद में कैसे रहे? दुख जगत में नहीं, आपकी अपनी बनाई दुनिया में है। मन की जो परिभाषा यहां दी गई है — कि मन संसार नहीं बनाता, जीव ही अपने तरीके से चाहिए के कारण संसार बनाता है, मन तो इंगित करता है — वह स्पष्ट कर लो, कोई संशय मत छोड़ो। यह प्रत्यक्ष मार्ग है; यहां मैं विश्वास की बात भी नहीं करता, क्योंकि विश्वास का नाम देकर आपका इतना समय बर्बाद कर दिया गया। मुझ पर विश्वास ही मत करना — ज्ञान को समझो और आगे बढ़ो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29