प्रश्नोत्तर P18-0194 · भाग 18
गुरु जी, राजसी-तामसी लोग जो खुशी अनुभव करते हैं (गाड़ी, मोबाइल, बंगला लेकर), वह किसे होती है — आत्मा को या जीव को? जीव और आत्मा दो हैं या एक?
वस्तुओं से जो खुशी की अनुभूति होती है, वह जीव कर रहा है; आत्मा को ना दुख है ना सुख। जीव और आत्मा एक ही हैं — जैसे पानी और बर्फ एक ही हैं; जब भी टूटेगा बर्फ टूटेगा, पानी नहीं टूट सकता, मिटेगा भी बर्फ ही। जब जीव अपने स्वभाव में, मूल में जाएगा तो समता भाव आ जाएगा, आनंद ही आनंद, और फिर परमानंद की यात्रा। जैसे बाहर से घर लौटने पर सुकून मिलता है, वैसा ही। और वह तभी प्राप्त होगा जब जितना प्राप्त किया है उसमें से राग-द्वेष निकल जाए — वस्तु नहीं छोड़नी, उसमें जो राग-द्वेष पाल रखे हैं वह छोड़ना है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29