आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0016 · भाग 19

गुरु जी, आप शिष्य क्यों नहीं बनाते? कई संस्थाएं कहती हैं देहधारी गुरु नहीं, शब्द गुरु है — फिर भी जीवंत गुरु क्यों जरूरी है?

12 साल तक भ्रमण किया, कुटिया नहीं बनाई; मेरा न कोई एक भक्त है न एक चेला — मैं सीधा ज्ञान देता हूं, बिना बंधन का, बिना शिष्य बनाए; ये लो और अपना आत्मिक कल्याण करो; गुरु मानो या न मानो, आपकी मर्जी। कबीर जी ने कहा जीवंत गुरु चाहिए — जो खुद पहुंचा हुआ हो उससे कल्याण होगा। वृक्ष बहुत विराट था पर सूख गया, अब वह छाया थोड़ी देगा; छोटा ही पेड़ हो, जाकर वहां बैठ जाओ, पर वह जीवंत होना चाहिए। किसी और की चेकबुक पर कोई और साइन करके सबको चेक बांट रहा है — मुख्य जगह जाओगे तो बाउंस हो जाएगा, और बाउंस का चार्ज भी लगेगा — काम भी नहीं हुआ और समय भी बर्बाद। गद्दी पर बैठे लोग जानते हैं उनके पास अपना कुछ नहीं, इसलिए पुराने नामों का प्रचार करवाते हैं।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29