प्रश्नोत्तर P19-0031 · भाग 19
गुरु जी, कहते हैं शरीर जड़ है — फिर इसी शरीर के द्वारा साध्य तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
एकै साधे सब सधे — अपने आप को साधना है, इस शरीर के द्वारा उस साध्य तक पहुंच सकते हो। इस शरीर को आखिरी का पता है: पृथ्वी पर जब से नर-मादा आए, शरीर से शरीर निकल रहा है — जिंदा से बच्चे पैदा होते हैं, मुर्दे से नहीं; शुक्राणु के भी पीछे जाओ, तो एक समय ऐसा रहा होगा जब यह शरीर पूरी तरह निर्विकार, चैतन्य होकर परमात्मा के सामने खड़ा रहा होगा, क्योंकि इसका निर्माण उसी ने किया। अभी इसे विकारों से भर दिया है। शुक्राणु अगर जड़ होता तो चलकर अंडाशय तक कैसे जाता? वह चेतन है। कोई अंग कट जाए तो कुछ देर हिलता रहता है, फिर स्थिर हो जाता है — आत्मा तो एक ही है, पर चेतनता उसमें थी। इसलिए इस शरीर के द्वारा उस साध्य तक पहुंचना है।
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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29