प्रश्नोत्तर P19-0077 · भाग 19
गुरु जी, सोचती हूं छोड़ दूं — ऐसा काम करूं कि राख मस्तक पर लगे?
ऐसा काम करो जीवन में। जूते-चप्पल के राख मत बनो। सोचने से कुछ नहीं होता — करने से होता है। एक दिन सोच ही रह जाएगी, क्षमता निकल जाएगी। तभी फैसला ले लो। महान दिव्य आत्मा के वस्त्र याद में रखे जाते हैं; सांसारिक के बच्चे कहते हैं अशुद्ध हटाओ।
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वीडियो: हरियाणा सोनीपत में तीन दिवसीय सत्संग का आखिरी दिन 21 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-23