आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0101 · भाग 19

गुरु जी, कर्म के बारे में पढ़ा था कि विकर्म और अकर्म भी होते हैं। ये क्या हैं?

अकर्म का मतलब है कर्म करते हुए अकर्ता का भाव लाओ। विकर्म — हो सकता है बुरे कर्म को विकर्म कह दिया हो। क्योंकि हमारे पास दो ही तरह के कर्म हैं — ईमानदारी से सत्कर्म, और बेईमानी से दुष्कर्म। यही है, और कुछ नहीं।

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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19