आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0113 · भाग 19

गुरु जी, आप कहते हो कि आपने कभी किसी के दरवाजे जाकर भोजन तक नहीं मांगा। क्या यह अहंकार की बात नहीं हुई?

आप जहां खड़े होकर बात कर रहे हो, वहां मैं नहीं खड़ा हूं। एक संन्यासी को कभी ऐसे नहीं करना चाहिए। हां, भिक्षुक है तो अलग बात है — वह भी पेट के लिए अल्पाहार, बस उससे ज्यादा नहीं; सुख के लिए नहीं, सुविधाओं के लिए नहीं। मैं वह नहीं था। 2011 से निकला हूं, कभी किसी को नहीं बोला कि मेरे लिए बनाओ — मेरे लिए उससे अच्छा मरना है; पूछा तो खाया, नहीं तो कोई बात नहीं। मेरे साथ भी परिस्थितियां बनीं, पर मैंने कहा तूने फैसला लिया है, तुझे आगे ही जाना पड़ेगा। जो व्यक्ति अपने आप को नहीं छोड़ता, वह आपको भी नहीं छोड़ेगा।

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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19