आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0128 · भाग 19

गुरु जी, मैंने "ठीक" शब्द का प्रयोग शुरू कर दिया है, लेकिन मन में फिर भी अच्छा-बुरा का भाव आ जाता है, और सामने वाला भी अच्छा सुनने की उम्मीद करता है। क्या करूं?

कोई बात नहीं, शरीर से प्रतिक्रिया ना दो; मन में आ गया तो आने दो, मुंह से ठीक ही कहो। धीरे-धीरे पहले बाहर से बंद करो, फिर अंदर से भी होने लगेगा। ठीक में ना अच्छा है ना बुरा — भोजन को ठीक कहा तो सामने वाला बुरा नहीं मान सकता; वह पूछे "सच में अच्छा नहीं बना?" तो भी आपको यही कहना है — ठीक है। सामने वाले की उम्मीद अच्छा सुनने की है, लेकिन आपको तो निकलना है। आपको बस इतना देखना है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग ना हो जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे; फिर भी पहुंचती है तो उसका जिम्मेदार वह है, क्योंकि लोग सतोगुण, रजोगुण, तमोगुण — तीनों में जीते हैं।

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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19